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harappa civilization complete notes – हडप्पा सभ्यता के नोट्स

इस लेख में हडप्पा सभ्यता (harappa civiliazation) से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों जैसे उत्थान-पतन (rise-fall), नगर योजना (town planning), कृषि–व्यवसाय(agriculture-buisness), आंतरिक-बाह्य व्यापार (internal and external trade), शिल्प(craft), धर्म-लिपि(religion-script). पशुपालन के बारे में जिक्र किया गया है.

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12th class

History- book 1st – Ncert

Chapter -1

 

1, हड़प्पा सभ्यता (harappa civilization), सिंधु घाटी सभ्यता (indus valley civilization), कास्युगीन सभ्यता (bronze age civilization) एक ही है तो वर्णन करें?

 

  • हड़प्पा सभ्यता (harappa civilization)

हड़प्पा सभ्यता पाकिस्तान में स्थित एक जगह सर्वप्रथम इस सभ्यता के साक्ष्य पाकिस्तान में स्थित हड़प्पा नमक स्थल से प्राप्त हुए इसलिए इसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से जाना जाता है

  • सिंधु घाटी सभ्यता (indus valley civilization)

इस सभ्यता का उद्भव सिंधु नदी के किनारे हुआ  इसलिए सिंधु घाटी सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है

  • कास्युगीन सभ्यता (bronze age civilization)

हड़प्पा सभ्यता के लोगो ने तांबे और टिन के मिक्षण से कांसे की बहुत सी वस्तुयें जिनमे हथियार, औजार, प्रतिमाये, बर्तन शामिल है बनाए. इस सभ्यता में बहुत अधिक मात्रा में कांस्य की वस्तुओं का प्रयोग किया जाता था  इसलिए इसे कास्युगीन सभ्यता भी कहते है.

 

 

  • हड़प्पा सभ्यता (harappa civilization) का कार्यकाल 2600 BC
  • विकास का काल 1900BC
  • पतन का काल 1700BC

* सबसे पहले 1853 में अलेक्जेंडर ने हड़प्पा सभ्यता का सर्वेक्षण किया था उनको वृषभ की 6 मोहरे प्राप्त हुई जिसे उन्होंने महत्व हीन बता कर छोड़ दिया।

*इसके बाद 1921 में हड़प्पा को खोज दयाराम साहनी ने की और 1922 में रखाल दास बनर्जी ने की थी।

* हड़प्पा सभ्यता (harappa civilization) की विशेषता शहर योजना पर आधारित थी

भौगोलिक विस्तार 1299600 वर्ग किलोमीटर

शहर योजना

उच्चतम नगर, समकोण पर सड़को को काटना, ग्रीड पद्धति पर आधारित , दुर्ग का निर्माण, जल निकास प्रणाली, स्नानागार, पक्की ईंटो का प्रयोग योजना वाले नालो का निर्माण.

उद्भव को लेकर विभिन्न मत

  • मैसोपोटामिया के लोगो को हड़प्पा सभ्यता का जनक माना गया है.
  • द्रविड़ उत्पत्ति का सिधांत
  • आर्य लोगो को भी इस सभ्यता का जनक माना जाता है.

हड़प्पा सभ्यता (harappa civilization) की नगरीय व्यवस्था

बसावट-

  • नगरीय प्रणाली के आधार पर
  • भवनों एवं सड़को का निर्माण
  • मोहनजोदड़ो- हड़प्पा के मकान और उनका दरवाजा या खिड़की मुख्य सड़क की और नही खुलते थे

नियोजित शहरी केंद्र – town planning

बस्ती दो भागो में विभाजित है, एक छोटा लेकिन उंचाई पर बनाया गया और दूसरा कही अधिक बड़ा लेकिन नीचे बनाया गया

पुरातत्वविदों ने इन्हें क्रमश: दुर्ग और निचला शहर का नाम दिया है.

दुर्ग की उचाई का कारण यह था कि यहाँ की संरचनाए कच्ची ईंटो के चबूतरे पर बनी थी. दुर्ग को दीवारों से घेरा गया था जिसका अर्थ है कि इसे निचले शहर से अलग किया गया था.

निचला शहर भी दिवार से घेरा गया था. इसके अतिरिक्त कई भवनों को उंचे चबूतरे पर बनाया गया था.

 

नाला निर्माण (जल विकास प्रणाली)

  • अनूठी विशेषता
  • सड़को तथा गलियों को लगभग एक ग्रिड पद्धति में बनाया गया था और ये एक दुसरे को समकोण पर काटती थी.
  • प्रत्येक घर के आगे से नाली निकलती थी
  • जो मुख्य सड़क या मुख्य नाली से जुडी होती थी.
  • प्रत्येक नाली ढकी हुई होती थी ईंटो से ढकी नालिया स्वछता का प्रतीक है

गृह स्थापत्य

  • दुर्गो का निर्माण हड़प्पा के दुर्ग दो भागों में विभजित थे।
  • पश्चिमी भाग (सामाजिक स्थिति) आलिशान उच्च वर्ग भवन निर्माण में पक्की ईंटो का प्रयोग स्नान घर नालो से जुड़ा होता था जो मुख्य नालो से मिलता था
  • पूर्वी भाग निम्न कोटि इस जगह निन्म कोटि के लोग रहते थे।

 

स्नानगार

  • विशाल स्नानागार आंगन में बना एक आयातकार जलाशय है जो चारो ओर से एक गलियारे से घिरा हुआ है
  • पक्की ईंटो से निर्माण, दोनों तरफ सीढ़ियों का निर्माण
  • स्नानागार से जल निकासी का प्रबंध
  • स्नानागार के बगल में भवन निर्माण
  • स्नानागार के बगल में कुए की प्रप्ति मोहनजोदड़ो में 700 कुए के साक्ष्य
  • इतिहासकार उसे धार्मिक स्थल के रूप में भी देखते है।

 

निर्वाह के तरीके

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आहार – पेड़ पौधों से प्राप्त उत्पाद और मछली, हडप्पा स्थलों से मिले अनाज के दानो में गेहूं, जौ, दाल, सफ़ेद चना तथा तिल शामिल है, हड़प्पा स्थलों से मिली जानवरों की हड्डियों में मवेशियों, भेड़, बकरी, भैंस तथा सूअर की हड्डिया शामिल है.जंगली प्रजातियों जैसे वराह (सूअर), हिरण तथा घड़ियाल की हड्डियाँ भी मिली है.

 

व्यवसाय का मुख्य साधन

 

कृषि (agriculture)

  • खेत जोतने के लिए बैलो का प्रयोग
  • मिट्टी के बने हल के प्रतिरूप मिले है
  • कालीबंगन (राजिस्थान) से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले है.
  • हड़प्पा से 6 कोठरी वाला अन्नागार प्राप्त हुआ है

9 तरह की कृषि के साक्ष्य मिले है

  • जौ, मटर, गेंहू, तिल, सरसो, बाजरा, कपास, चावल

लोथल-चावल बनावली- जौ

मोहन जोदड़ो- सूती वस्त्र

लोथल-बाजरा

  • नवंबर में खेती होती थी और अप्रैल में काट दी जाती थी।

 

आर्थिक व्यापारिक गतिविधियां

आंतरिक व्यापार

  • हड़प्पा के मुख्य स्थल एक दूसरे से जुड़े होने के संकेत मिले है
  • हड़प्पा में एक स्थल से दूसरे स्थल तक व्यापार होता था (कर्नाटक–सोना, राज्यस्थान– तांबा और सीसा, गुजरात- कीमती पत्थर)

 

बाह्य व्यापार

  • मैसोपोटामिया में मेलुहा बेलनाकार की मोहरे प्राप्त हुई
  • मेलुहा हड़प्पा के लिए प्रयोग किया जाता था।
  • ईरान इराक के लिए व्यापार लोथल में बंदरगाह के साक्ष्य जहा चावल का व्यापार होता था।

शिल्प उद्योग

  • कांस्य का प्रयोग करते थे इसलिए कांस्युगीन सभ्यता भी कहते है
  • मिट्टी के बर्तन का प्रयोग
  • हाथी के दाँत से बनी हुई वस्तुओं का प्रयोग जैसी कला से परिचित थे
  • सोना चांदी से भी परिचित थे, स्त्री पुरुष एक ही तरह के आभूषण पहनते थे।
  • चन्हूदड़ो/ पाकिस्तान में मटका और गुड़िया गुड़िया निर्माण के साक्ष्य मिले है
  • मोहनजोदड़ो- नृत्यक स्त्री की प्रतिमा मिली है।

 

 

पशुपालन

पशु

  • भैस, बैल, गाय, बकरी, बतख, मुर्गी मोर बरसिंह, हाथी।

 

धर्म

बहुदेववादी

  • मातृदेवी वृक्ष – पीपल
  • जल देवता और नाग देवता की पूजा के साक्ष्य
  • घड़ियाल की पूजा
  • मंदिर का निर्माण नही है
  • मोहनजोदड़ो में एक पुजारी की मूर्ति मिली है जिसके आस पास बाघ हिरन, भैस है।

 

हड़प्पा सभ्यता का पतन ( 2600 BC से1900 BC)

सभ्यता का अंत कई कारणों से हुआ

 

1)आर्यों का आक्रमण

  • मार्टिमर व्हीलर ने आर्य आक्रमण की अवधारणा पर बल दिया है
  • अपने मत की पुष्टि के लिए उन्होंने कुछ पुरातात्विक साक्ष्य प्रस्तुत किये
  • मोहनजोदड़ो से प्राप्त 26 नरकंकाल.
  • हडप्पा से कब्रगाह H के साक्ष्य
  • साहित्यिक साक्ष्य- ऋग्वेद में वर्णित ‘’हरियूपिया’ की पहचान हड़प्पा से की
  • पुरंदर शब्द को आर्य आक्रमण से जोड़ा

2)जलवायु परिवर्तन – जलवायु संबंधी कारको को हड़प्पा सभ्यता के पतन में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

  • बाढ़ का आना
  • मोहनजोदड़ो में बार बार बाढ़ के आने के साक्ष्य मिले है।
  • नदियों का सूख जाना या नदियों का मार्ग बदल लेना

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