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साहित्यिक और पुरातात्विक स्त्रोतो का वर्णन – archaeological & literary sources

विदेशियों के वृतान्त

विदेशी वर्णनों से राजनितिक और सामाजिक दशा पर अधिक प्रभाव पड़ता है. क्योकि उनकी धर्मेतर घटनाओ में विशेष रूचि थी. इन लेखको का समय भी प्राय: निश्चित है. इसलिए उनके वर्णन भारतीय लेखको के वर्णनों की अपेक्षा अधिक सिद्ध हुए है.

विदेशियों के वृतांतो का विवेचन तीन वर्गो में करेंगे.

  • यूनान और रोम के लेखक
  • चीन के लेखक
  • अरब के लेखक

यूनान और रोम के लेखक

यूनान और रोम के लेखको में सबसे प्राचीन हेरोडोटस और टिसियस के वृतांत है. हिरोडोटस जिसे इतिहास का पिता भी कहा जाता है की गणना प्राचीन यूनानी लेखको में सबसे महत्वपूर्ण है. इनके द्वारा लिखित हिस्टोरिका से भारत के व्यापार दुसरे देशो से कैसे रहे के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है. टिसियस के वर्णन में अधिकतर कल्पित कहानिया है जो पूर्णत: अविश्वसनीय है. इन दोनों लेखको की अपेक्षा उन यूनानी लेखको के वर्णन अधिक महत्व पूर्ण है जो सिकंदर के साथ भारत आये थे. उदा० के लिए नियाक्रस, आनेसिक्रिटस और अरिसटोबुलस के वर्णन, इनसे भी अधिक महत्वपूर्ण वर्णन मेगस्थनीज का है. मेगास्थनीज चन्द्रगुप्त के दरबार में 14 वर्षो तक रहा उसने अपनी पुस्तक इंडिका में मौर्य कालीन समाज और संस्कृति का उल्लेख किया है, टोलेमीद्वारा लिखित GEOGRAPHY हमें नक्शा बनाने के सिधांत, भारतवर्ष के पड़ोसी देशो की जानकारी प्राप्त होती है. पेरिप्लस आफ द एरिथियन सी किसी अज्ञात लेखक के द्वारा लिखित यह पुस्तकहमें समुंद्री व्यापार से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है. प्लिनी के द्वारा लिखित NATURAL HISTORICA से हमें भारत तथा रोम के बीच होने वाले महत्वपूर्ण व्यापर के बारे में सुचना प्राप्त होती है.

चीनी यात्रियो के वृतांत

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चीनी यात्रियों में बौध धर्म को मानने वाले यात्री थे. इनमे फाहियान, युवान च्वांग और ई चिंग के वर्णन है. फाहियान गुप्त काल में भारत आया, उसने  भारत की राजनितिक स्थिति के बारे में न लिखकर बौध धर्म के बारे में लिखा. युवान च्वांग हर्ष के राज्यकाल में भारत आया था और वह 16 वर्ष भारत में रहा. उसने धार्मिक अवस्था के साथ साथ तत्कालीन राजनितिक दशा का भी वर्णन किया है, उसके द्वारा लिखित पुस्तक सि-यू-की है. सातवी शताब्दी के अंत में ई-चिंग भारत आया था. वह बहुत समय तक नालंदा और विक्रमशिला के विश्वविधालयों में रहा. उसने बौध शिक्षा संस्थाओ और भारतीयों की वेशभूषा, खानपान आदि के बारे में लिखा है.

अरब यात्रियों के वृतांत

8वी शताब्दी से अरब लेखको ने भारत के विषय में लिखना आरंभ कर दिया था. सुलैमान 9वी शताब्दी इसवी के मध्य में भारत आया था. उसने पाल और प्रतिहार राजाओ के विषय में लिखा है. अल मसूदी 941 इसवी से 943 इसवी तक भारत में रहा, उसने राष्ट्रकूट राजाओ की महत्ता के विषय में लिखा है. किन्तु अरब लेखको में सबसे प्रसिद्ध अबु रिहान है. उसका दूसरा नाम अलबिरूनी था. वह महमूद गजनवी का समकालीन था, उसने संस्कृत भाषा सीखी और भारत की सभ्यता एवं संस्कृति को पूर्ण रूप से जानने का प्रयत्न किया. उसकी पुस्तक किताब-उल-हिन्द थी.

 

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