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साहित्यिक और पुरातात्विक स्त्रोतो का वर्णन – archaeological & literary sources

 

साहित्यिक स्त्रोत (literary sources)

प्राचीन भारतीय साहित्य को हम दो भागो में बाँट सकते है.

धार्मिक साहित्य और लौकिक साहित्य

धार्मिक साहित्य में ब्राह्मण साहित्य, बौद्ध साहित्य और जैन साहित्य आते है

ब्राह्मण साहित्य में वेद पुराण, स्मृति, रामायण, महाभारत, उपनिषद आदि आते है.

 

वेद चार है ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अर्थवेद.

ऋग्वेद-सबसे प्राचीन वेद, यह आर्य जाती की प्राचीनतम सुचना मानी जाती है, इस ग्रन्थ से प्राचीन आर्यों के धार्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन पर कुछ अधिक और राजनितिक जीवन पर कुछ कम प्रभाव पड़ता है.

यजुर्वेद– इसमें यज्ञो के नियम व विधि विधान का संकलन है.

सामवेद– साम का अर्थ गान होता है, इस तरह से सामवेद में यज्ञो के अवसर पर गाये जाने वाले मंत्रो का संग्रह है.

अर्थवेद– इसमें जनता के विचारो व अंधविश्वासों का विवरण मिलता है, इसमें जादू,टोने,रोग,निवारण, प्रेम विवाह आदि पर मन्त्र है.

पूराण

पूराण का प्राचीन अर्थ आख्यान होता है. इनमे राजाओ की वंशावली, तत्कालीन समाज, धर्म, भूगोल आदि के बारे में जानकारी प्राप्त होती है.

रामायण/महाभारत

दोनों को महाकाव्यों के नाम से जाना जाता है, इन महाकाव्यों से उत्तर वैदिक काल में आर्यों के जीवन के विषय में कुछ जानकारी मिलती है. , हिन्दू संस्कृति के बारे में दोनों ही ग्रन्थ महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते है., महाकाव्य में जो जानकारी धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के बारे में मिलती है वैसी कही ओर नहीं मिलती.

उपनिषद

इसका अर्थ समीप बैठना होता है, उपनिषदों में आत्मा परमात्मा व संसार के दार्शनिक विचारो के बारे में जानकारी प्रदान की है. इन्हें वेदांग के नाम से भी जाना जाता है.

स्मृति

सबसे प्राचीन स्मृति मनु की है,नारद और पराशर की स्मृतियों से गुप्तकाल के सामाजिक और धार्मिक जीवन पर प्रयाप्त प्रकाश पड़ा है.

बौद्ध साहित्य

बौद्ध साहित्य के अंतर्गत बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रन्थ आते है, जैसे सुत्तपिटक, विनयपिटक एवं धम्म पिटक, इन्हें त्रिपिटक के नाम से भी जाना जाता है. इनकी रचना पाली भाषा में हुई. ये तीनो ही पीटक भारत की सामाजिक, धार्मिक जीवन के बारे में जानकारी प्रदान करते है

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बुद्ध धर्म से संबंधित एक अन्य महत्वपूर्ण ग्रन्थ है दीपवंश जो चौथी शताब्दी में लिखा गया. इसके अलावा महावंश जिसके रचियता भदंत महानामा है से प्राचीन भारत के बारे में विशेष रूप से मगध के प्रशासन के बारे में जानकारी प्राप्त होती है. मिलिंद पन्हो से हमें बौध भिक्षु नागसेन और राजा मिनांडर  के बिच दार्शनिक वाद-विवाद के बारे में जानकारी प्राप्त होती है. संस्कृत भाषा में लिखित बौद्ध ग्रन्थ ललितम विस्तार महावस्तु से हमें महात्मा बुध के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है.. दिव्यावादान से हमें मौर्योंतर काल के राजाओ के बारे में जानकारी प्राप्त होती है. आर्य-मंजु-श्री-मूल-कल्प से हमें गुप्त वंश के राजाओ के बारे में जानकारी प्राप्त होती है. बौध साहित्य से भारत और विदेशो के संस्कृतिक संबंधो पर बहुत प्रकाश पड़ा है.

जैन साहित्य

अधिकांशत: जैन ग्रंथ अर्ध मागधी (प्राकृत) भाषा में लिखे गए है. जैन धर्म की शिक्षाओ को आगम नामक घर्म ग्रंथ में संकलित किया गया. कल्पसूत्र जो भद्रबाहु के द्वारा लिखा गया है से हमें जैनियों के प्रारंभिक इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है. “भगवती सूत्र” से मे महावीर जैन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है. जैन जैन भिक्षुओ के लिए नियमो के बारे में आचारांग सूत्र से जानकारी मिलती है. नायाधम्मकहा में महावीर की शिक्षाओ का संग्रह है. परिशिष्ट पर्व (12 शताब्दी) तथा भद्रबाहु चरित्र से हमें चन्द्रगुप्त मौर्य के जीवन के जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है. सम्रादित्य कथा जो हरिभद्र सूरी व कुवलय माला से हमें प्राचीन भारतीय समाज की सामाजिक, धार्मिक स्थिति का पता चलता है.

 

धर्मेतर भारतीय साहित्य तथा लौकिक साहित्य

लौकिक साहित्य में हमें जीवनिया आती है. पाणिनि की अष्टाध्यायी जिसे व्याकरण ग्रंथो में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है से हमें मौर्योतर काल की स्थिति का ज्ञान होता है. कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र से हमें मौर्य शासक और प्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त होती है. मुद्राराक्षस जिसके रचियता विशाखदत्त है तथा कथासरित्सागर जिसके रचियता सोमदेव है तथा क्षेमेन्द्र की बृहत्कथा मंजरी से हमें मौर्य काल के इतिहास की बारे में हमें महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है. कालिदास द्वारा रचित मालविकाग्निमित्र से हमें हमें रजा पुष्यमित्र व अग्नि मित्र शुंग के बारे में जानकारी प्राप्त होती है. बाणभट का हर्षचरित्रम से राजा हर्ष के बारे में तथा कामंदक के नितिसार से उस समय के आचार व्यवहार के बारे में जानकारी प्राप्त होती है. कल्हण की राजतरंगीणी से हमें कश्मीर के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त होती है. जयानक द्वारा रचित पृथ्वीराज विजय नामक ग्रन्थ से हमें पृथ्वी राज की विजय के बारे में जानकारी प्राप्त होती है.
विदेशियों के वृतान्त भी sources में बहुत महत्व रखते है, पढ़ने के लिए अगले पेज पर जाए

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